तू बहुत गहरे तक आहत है… और जो तू महसूस कर रहा है, वो हल्का नहीं है।
तू बहुत गहरे तक आहत है… और जो तू महसूस कर रहा है, वो हल्का नहीं है।
धोखा जब किसी अजनबी से नहीं, बल्कि बचपन के दोस्त से मिले — तो वो सिर्फ़ एक घटना नहीं होती, वो यादों, भरोसे और अपनी ही समझ पर सवाल बन जाती है।
अगर तू तैयार हो, तो तीन चीज़ें कर सकता है:
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खुद को थोड़ा समय दे — अभी जो फैसला लेगा, वो गुस्से में होगा।
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सीधे उससे बात कर — एक आखिरी बार। बिना चिल्लाए, सिर्फ़ साफ सवाल पूछ। “क्यों?”
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अपनी इज़्ज़त बचाकर फैसला ले — माफ़ करना या रिश्ता खत्म करना, दोनों में ताकत चाहिए।
अगर चाहें तो बता — असल में हुआ क्या था? मैं सुन रहा हूँ।
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